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हिन्‍दुओं का पवित्र माह सावन शुरू हो गया है। इस महीने भगवान शिव का अभिषेक करने के लिए भक्‍तों में होड़ मची रहती है। आइए, जानते हैं श्रावण मास में कांवर यात्रा क्‍यों है महाफलदाई और क्‍यों लाखों शिवभक्त हर साल कंधे पर कांवर लेकर करते हैं बाबा वैद्यनाथ धाम की पवित्र किंतु कठिन यात्रा।
Published 19-Jul-2017 16:37 IST
सावन मास की शुरुआत के साथ ही शिव मन्दिरों का नजारा ही अलग है। हर तरफ बम भोले की गूंज है। धार्मिक मान्यता है कि सावन में भोलेनाथ के पूजन और अभिषेक से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यूं तो संपूर्ण श्रावण मास ही शिव अराधना के लिए विशेष है, किन्तु श्रावण सोमवार का अपना अलग ही महत्व है।
Published 16-Jul-2017 19:37 IST
जब रविवार के दिन सप्तमी तिथि होती है तब 'भानु सप्तमी' का पर्व मनाया जाता है। भानु सप्तमी के दिन भगवान सूर्यनरायण के लिए व्रत रखते हुए उपासना करने से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों में भानु सप्तमी के दिन किए गए जप, हवन, दान से सूर्य ग्रहण पर किए गए उपायों की तरह फलMore
Published 14-Jul-2017 19:59 IST | Updated 13:36 IST
सावन महीने का प्रारम्भ सोमवार को हो चुका है। धार्मिक मान्यता है कि सावन में भोलेनाथ के पूजन और अभिषेक से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन इसके साथ ही एक रोचक और महत्वपूर्ण घटना है कि, क्यों श्रावण मास ही भगवान शिव को समर्पित है। तो आइये जानते हैं श्रावण मास के बारे में रोचक बातें।
Published 13-Jul-2017 14:31 IST | Updated 13:44 IST
सनातन धर्म में शुभ कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा अनिवार्य बताई गयी है। देवता भी अपने कार्यों की शुरुआत में गणेश जी की पूजा अर्चना सबसे पहले करते हैं। धर्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायकी तथा कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी कहलाती है।
Published 11-Jul-2017 14:23 IST
चित्रकूट। रिमझिम फुहारों के बीच सावन में शिवालयों में गूंजता बोल बम का जयकारा और भक्ति के जल प्रपात से सराबोर भगवान भोलेनाथ, कुछ ऐसा ही दृश्य दिखाई दिया सावन के पहले सोमवार को। भोर से ही शिवालयों में भोलेनाथ की भक्ति में झूमते आस्थावान जय-जयकार करते हुए जलाभिषेक व रूद्राभिषेक के लिए उमड़ पड़े।
Published 10-Jul-2017 19:24 IST | Updated 12:18 IST
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी को तीर्थों की संगम स्थली कहा जाता है, पूरी धर्मनगरी सावन में भोलेनाथ के रंग में रंगी है। हर तरफ बम भोले की गूंज हो रही है, सावन मास की शुरुआत के साथ ही शिव मन्दिरों का नजारा ही अलग है। श्री मार्कण्डेश्वर महादेव ठसका मीरां जी, पवित्र सन्निहित सरोवर, दुःख भंजन महादेव मन्दिर,More
Published 10-Jul-2017 16:09 IST | Updated 11:58 IST
वाराणसी। सावन के पवित्र महीने में प्रथम सोमवार को काशी में एक सैकड़ों साल पुरानी परम्परा निभाई गई। इस पवित्र पर्व पर वारणसी में यदुवंशी परिवार के लोग सबसे पहले श्री काशी विश्वनाथ मंदिर सहित शहर के कई शिवालयों में पतित पावनी माता गंगा के गंगा जल को अपने अपने घड़ों में लेकर शिवलिंगों का जलाभिषेक करतेMore
Published 10-Jul-2017 12:45 IST | Updated 11:49 IST
देवों के देव महादेव के पूजन का खास माह श्रावण आगामी 10 जुलाई से शुरू हो रहा है। ऐसे में महादेव की नगरी कही जाने वाली काशी में भी भक्तों का आना शुरू होने वाला है। अगर बात श्रावण मास की करें तो देश के कोने-कोने से ही नहीं बल्कि विदेशों तक से इस माह में श्रद्धालु यहां बाबा के दरबार में उन्हें जल अर्पणMore
Published 09-Jul-2017 19:41 IST | Updated 11:43 IST
विष्णु पुराण में वर्णित है कि कलयुग में शिव की पूजा अर्चना करने से मुक्ति मिल जाती है। शिव 108 नामों से जाने जाते हैं। श्रावण मास में ही समुद्र मंथन हुआ था और प्रत्येक सोमवार को ही एक विशेष फल की प्राप्ति हुई थी। लिहाजा सोमवारी के दिन शिव पूजन करने से भाग्य में तेजी आती है। कई वर्षों के बाद ऐसाMore
Published 09-Jul-2017 17:50 IST | Updated 13:32 IST
आज संपूर्ण विश्व में गुरू पूर्णिमा का पर्व बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन सभी लोग सामर्थ्यानुसार व्रत, उपवास रखकर गुरु पूजन करके उन्हें दक्षिणा देकर प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। गुरुपूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों, सरोवरों आदि में स्नान करने के बाद पूजा करने का विधि-विधान है।More
Published 09-Jul-2017 14:02 IST | Updated 15:27 IST
मुंगेर। गुरु पूर्णिमा को लेकर आज गंगा स्थान के लिए सुबह से हजारों श्रद्धालु मुंगेर पहुंचे। हजारों लोगों ने गंगा में डूबकी लगायी। इसके बाद पूजा अर्चना और दान-पुण्य किया।
Published 09-Jul-2017 09:44 IST | Updated 10:10 IST
वैसे तो हर महीने की पूर्णिमा का अपना ही महत्व होता है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा को गुरु की पूजा की जाती है। यह पर्व बड़ी श्रद्धा भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है।
Published 09-Jul-2017 12:02 IST | Updated 15:55 IST
हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत अत्‍यंत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशी होती है। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। कहीं-कहीं इस तिथि को 'पद्मनाभ' भी कहते हैं।
Published 04-Jul-2017 13:56 IST | Updated 14:35 IST
सूर्य नमस्कार में बारह मंत्र उचारे जाते हैं। प्रत्येक मंत्र में सूर्य का भिन्न नाम लिया जाता है। हर मंत्र का एक ही सरल अर्थ है - सूर्य को (मेरा) नमस्कार है। सूर्य नमस्कार के बारह स्थितियों या चरणों में इन बारह मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।
Published 02-Jul-2017 08:01 IST | Updated 17:08 IST

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