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भगवान शिव की अमोघ शक्‍तियों का केंद्र है त्रिशूल। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि भारत में एकमात्र बैद्यनाथ ज्‍योतिर्लिंग ही है जहां त्रिशूल की जगह पंचशूल भगवान शिव का अस्‍त्र है। सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्‍यों है? आइए जानते हैं।
Published 20-Jul-2017 16:30 IST
वाराणसी में एक ऐसा भी गुरूद्वारा है जहां गंगा का जल आज भी अमृत है और भक्तों को हर रोग से मुक्ति देता आ रहा है। गुरुद्वारे में आज भी मां गंगा का जल श्रोत बिल्कुल निर्मल रूप में मौजूद हैं। जिसका दर्शन भक्त करते हैं और अमृत जल भी ग्रहण करते है जिससे कई सारे रोगों से लोगों को मुक्ति मिलती है।
Published 19-Jul-2017 13:11 IST | Updated 13:53 IST
नूंह। शिव भक्तों की यह मान्यता है कि जो सच्चे मन से अपनी मुराद यहां के मंदिर में मांगता है,भोले नाथ उसे कभी निराश नही करते हैं। इसलिए युवतियां व महिलाएं भी 108 जेघड़ से मंदिर के कुएं से पानी लेकर भोले को स्नान कराती हैं ओर मनवांछित फल पाती है।
Published 16-Jul-2017 13:11 IST | Updated 13:36 IST
अमरनाथ, भगवान भोले के दर्शन जहां होते हैं। इस गुफा में बनता प्राकृतिक शिवलिंग दैवीय शक्ति होने का एहसास दिलाता है और मन में श्रद्धा भाव अनायास ही उठने लग जाता है। अमरनाथ यात्रा का जितना पौराणिक महत्व है, उतना ही ऐतिहासिक महत्व भी है। पुराण अनुसार, काशी में शिवलिंग दर्शन और पूजन से दस गुना, प्रयाग सेMore
Published 12-Jul-2017 12:53 IST
काशी और बनारस के नाम से विख्यात वाराणसी विश्व के प्राचीनतम जीवंत शहरों में एक है। 'वामन पुराण' के अनुसार वरूणा और असि नदियों के मध्य की भूमि ही 'वाराणसी' कहलाती है, जो सभी तीर्थयात्रियों के लिए पवित्रतम स्थान है। वाराणसी हिंदू धर्म का नाभिस्थल है। यह प्राचीन संस्कृति का परंपरागत शहर है। यहां सेMore
Published 11-Jul-2017 00:15 IST | Updated 09:51 IST
चित्रकूट। रिमझिम फुहारों के बीच सावन में शिवालयों में गूंजता बोल बम का जयकारा और भक्ति के जल प्रपात से सराबोर भगवान भोलेनाथ, कुछ ऐसा ही दृश्य दिखाई दिया सावन के पहले सोमवार को। भोर से ही शिवालयों में भोलेनाथ की भक्ति में झूमते आस्थावान जय-जयकार करते हुए जलाभिषेक व रूद्राभिषेक के लिए उमड़ पड़े।
Published 10-Jul-2017 19:24 IST | Updated 12:18 IST
मधुबनी। अगर आप घुमने के शौक़ीन हैं और नई जगह, अनोखी व दुर्लभ चीज देखना चाहते हैं तो, आपको मधुबनी जरूर घूमना चाहिए। मधुबनी जिला के मंगरौनी गांव में ऐसा ही अदभूत श्री श्री 1108 एकादश रूद्र महादेव मंदिर है जो मधुबनी बस स्टैंड से तीन किलोमीटर दूर है।
Published 10-Jul-2017 17:44 IST
शेखपुरा। शहर के गिरिहिंडा चौक स्थित आठ सौ फीट ऊंचे पहाड़ पर स्थापित शिव-पार्वती मंदिर में सच्चे मन से पूजा करने पर मन्नतें पूरी होती है। इस मंदिर में श्रृद्धालुओं की तांता लगी रहती है।
Published 10-Jul-2017 04:15 IST
देवों के देव महादेव के पूजन का खास माह श्रावण आगामी 10 जुलाई से शुरू हो रहा है। ऐसे में महादेव की नगरी कही जाने वाली काशी में भी भक्तों का आना शुरू होने वाला है। अगर बात श्रावण मास की करें तो देश के कोने-कोने से ही नहीं बल्कि विदेशों तक से इस माह में श्रद्धालु यहां बाबा के दरबार में उन्हें जल अर्पणMore
Published 09-Jul-2017 19:41 IST | Updated 11:43 IST
विष्णु पुराण में वर्णित है कि कलयुग में शिव की पूजा अर्चना करने से मुक्ति मिल जाती है। शिव 108 नामों से जाने जाते हैं। श्रावण मास में ही समुद्र मंथन हुआ था और प्रत्येक सोमवार को ही एक विशेष फल की प्राप्ति हुई थी। लिहाजा सोमवारी के दिन शिव पूजन करने से भाग्य में तेजी आती है। कई वर्षों के बाद ऐसाMore
Published 09-Jul-2017 17:50 IST | Updated 13:32 IST
'भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे' हनुमान चालीसा की यह पंक्ति सबसे शक्तिशाली मानी जाती है, जिसका मतलब है कि महावीर(हनुमान जी) का नाम मात्र लेने से आपके पास भूत-पिशाच नहीं भटकते। हनुमान जी का हमारे धर्म ग्रंथ में एक अलग ही महत्व है। माना जाता है कि कलियुग में यह ईश मौजद हैं।
Published 08-Jul-2017 00:15 IST | Updated 10:27 IST
बलरामपुर। जनपद मुख्यालय से मात्र तीन किमी दूरी पर स्थित बिजलेश्वरी देवी का मन्दिर श्रद्धालुओं के आस्था एवं विश्वास का केन्द्र है। इस मन्दिर के बारे में माना जाता है कि यहां पर देवी मां बिजली की तरह प्रगट हुई थी। जिसके कारण इस स्थान का नाम बिजलीपुर पड़ा तथा मन्दिर को बिजलेश्वरी देवी के नाम से जानाMore
Published 06-Jul-2017 16:09 IST | Updated 16:12 IST
गोरखपुर। तहसील गोला के डेहरीभार ग्राम पंचायत में स्थित डरारी की समय माता के द्वार पर जो भी भक्त जाते हैं और जो भी मन्नत मांगते हैं उसको डरारी की समय माता अविलंब पूरा करती हैं। क्षेत्र के लोग सैकड़ों किलोमीटर दूर से पूजा पाठ के लिए यहां आते हैं। जो भी भक्त गण श्रद्धा पूर्वक समय माता के चरणों में सिरMore
Published 05-Jul-2017 17:44 IST | Updated 17:47 IST
बलरामपुर। तहसील तुलसीपुर नगर से दो कि॰मी॰ की दूरी पर सिरिया नाले के समीप 51 शक्तिपीठों में से एक मां देवीपाटन माता सती के वाम स्कंध गिरने के कारण यह स्थल सिद्ध पीठ बना। भारत नेपाल सीमा की निकटता तथा उभय राष्ट्रों की धार्मिक एक रूपता के कारण यह पावन स्थल दोनों ही देशों के करोड़ों श्रद्वालुओं कीMore
Published 05-Jul-2017 16:25 IST | Updated 16:32 IST
कानपुर। एक तालाब की अनोखी मान्यता है, जहां पर नहाने से चर्म रोग व फोड़े फुंसी जैसे रोग ठीक हो जाते है। लोगों को मानना है कि यदि रविवार व मंगलवार को स्नान करने के बाद बराही देवी की पूजा करते हैं तो इस घातक रोग से छुटकारा मिल जाता है। खास बात यह है कि बरसात के दौरान ही इस तालाब में पानी आता है।
Published 05-Jul-2017 14:58 IST | Updated 19:49 IST

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